Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

अकस्मात्

टैक्सी रोकने को उठे मीता के हाथ पर किर्र के साथ यलो कैब रुक गई. टैक्सी ड्राइवर एक सौम्य अमरीकी युवक था. थोड़ा सा टैक्सी का शीशा उतार शालीनता से अंग्रेज़ी में पूछा था-

“यस , मिस, आइए कहाँ जाना है?”

अपने कॉलेज का नाम बताती मीता कैब में बैठ गई थी. कॉलेज का पता बताने के प्रयास में चालक ने शान्ति से जवाब दिया था-

“डोंट वरी, मुझे पता मालूम है, बस अपने डिपार्टमेंट का नाम बता दीजिए,”

बीस मिनट में टैक्सी मीता के डिपार्टमेंट के सामने रुकी थी. टैक्सी से उतर मीता के लिए डोर खोलते  चालक ने पूछा था –

“आपका क्लास किस समय खत्म होगा, आपको वापिस ले जा सकता हूँ.”१

“नहीं उसकी ज़रुरत नहीं है, मै मैनेज कर लूंगी.”

“आपने जहां से कैब ली, उस तरफ शाम को कोई बस नहीं जाती. सड़क की मरम्मत की वजह से शाम को ब्रिज पर ट्रैफिक वन- वे हो जाता है. आपको मुश्किल हो सकती है. –”

“थैंक्स, मै मुश्किलों से नहीं डरती. उसकी बात अधूरी काट, मीता ने कहा.

“ऐनी वे, ये लीजिए मेरा कार्ड रख लीजिए, शायद कभी ज़रुरत में काम आ सकूं.’ पेमेंट करती मीता के हाथ पर उसने अपना कार्ड रख दिया. कार्ड देने के बाद तुरंत टैक्सी स्टार्ट कर के वह जा चुका था.

मीता के मन में आया कार्ड पर्स में न रखे, फिर कुछ सोच कर कार्ड पर सरसरी निगाह डाली थी. कार्ड पर रिचर्ड ब्राउन नाम के साथ टेलीफोन नंबर दिया हुआ था.
मीता को अमरीका आए अभी एक  सप्ताह ही हुआ था. बेटी को अमरीका भेजते पापा और मम्मी को यही संतोष था कि पापा के एक मित्र का पुत्र राजीव अपने परिवार के साथ इसी शहर में रहता था. चार-पांच दिन राजीव के घर रहती मीता को पूरे परिवार ने इस तरह से अपना लिया मानो वे उसे बहुत पहले से जानते थे. राजीव की पत्नी नीरा और पांच वर्ष की बेटी नेहा मीता के आने से बेहद खुश थीं. मीता के आग्रह पर राजीव ने अपने घर के पास ही मीता के लिए एक अपार्टमेन्ट अरेंज कर दिया था. राजीव के परिवार के पास अपार्टमेन्ट लेने से मीता नए शहर में अपने को अजनबी महसूस नहीं कर रही थी. एक बात तो मीता की समझ में आ गई, अमरीका में कार के बिना जीवन गति हींन है. जल्दी ही उसे ड्राइविंग- स्कूल ज्वाइन करना होगा.
आज उसने अपने आप कॉलेज जाने का निश्चय किया था. राजीव ने बताया था, नियत समय पर एक बस यूनीवर्सिटी के विद्यार्थियों को बस स्टैंड से ले जाती है. लौटने के लिए भी एक नियत समय पर वह वापिस आ सकती है. अगर बस मिस हो गई तो टैक्सी ली जा सकती है. आज अपार्टमेन्ट की चाभी खोजती मीता बस के लिए लेट हो चुकी थी, पर जल्दी ही टैक्सी मिल जाने से वह समय पर पहुँच गई
एम बी ए करने आई मीता को अपना डिपार्टमेंट बहुत अच्छा लगा था. प्रोफ़ेसर के लेक्चर उसे प्रभावित करने में पूर्ण सक्षम थे. मीता के साथ अमरीकी तथा कुछ बाहर के देशों के विद्यार्थी भी थे.. मीता का साथ की लड़कियों के साथ परिचय बढ़ने लगा. उसके साथियों ने उसे आसानी से अपना लिया. यह निश्चित था, अमरीका में जाति -धर्म का कोई भेदभाव नहीं था. मीता ने महसूस किया यहाँ. अधिकाँश विद्यार्थी पढाई के लिए बहुत सीरियस थे. क्लास डिस्कशान में  सबकी भागीदारी होती, आपस में भी सब सहज और खुले मन से बातें करते. मीता सोचती अमरीका आकर उसने गलती नहीं की.
आज प्रोफ़ेसर मौरिस ने अपने लेक्चर के बाद लाइब्रेरी में कुछ अच्छी रेफरेंस- बुक्स के नाम दिए थे. मीता उन किताबों को लेने लाइब्रेरी पहुंची, पर अभी उसका लाइब्रेरी-कार्ड नहीं बना था. किताब ले कर लाइब्रेरी के एक कोने में बैठ, मीता किताब पढने लगी. अपनी तल्लीनता में मीता को समय का अंदाज़ ही नहीं हुआ. बाहर आने पर अन्धेरा देख मीता समझ गई, उसकी बस नियत समय पर जा चुकी थी.
यूनीवर्सिटी के बस स्टैंड पर चार-पांच लड़के किसी बस की प्रतीक्षा कर रहे थे. मीता ने जब उनसे अपने अपार्टमेन्ट की और जाने वाली बस या टैक्सी के बारे में पूछा तो उन्होंने वही सूचना दी, जो सवेरे रिचर्ड ने दी थी. मीता के पास किसी और टैक्सी का नंबर भी नहीं था. अन्तत: रिचर्ड को कॉल किया-
”रिचर्ड, मै मीता बोल रही हूँ, सवेरे मुझे कॉलेज लाए थे, क्या मुझे वापिस ले जाने को आ सकते हो?”
“माई प्लेज़र, दस मिनट में पहुँच जाऊंगा. बस स्टैंड पर वेट कीजिएगा.”
यलो कैब आती देख मीता ने आश्वस्ति की सांस ली. यह सच था, उसका अपार्टमेन्ट शहर के बाहरी हिस्से में पड़ता था, पर राजीव का घर पास होने से उसे उनका बड़ा सहारा था.
“थैंक्स, आप इतनी जल्दी कैसे पहुँच गए?’कैब में बैठती मीता ने पूछा.
“मै कम्प्यूटर डिपार्टमेंट में काम कर रहा था. आपकी परेशानी का अंदाज़ था. फोन मिलते ही आ गया.”
“कम्प्यूटर डिपार्टमेंट में तुम क्या कर रहे थे?” मीता विस्मित थी.
“आजकल कम्प्यूटर के बिना काम नही चलता, अच्छी नौकरी की कोशिश में हूँ.”
“तुमने कहाँ तक पढाई की है?”मीता ने जानना चाहा.
“आप जितना लकी नहीं हूँ जिन्हें माँ-बाप का सहारा मिलता है.अपनी मेहनत से जितना पढ़ पा रहा हूँ पढ़ रहा हूँ.”उसकी आवाज़ में उदासी थी.
“अपनी हिम्मत से आगे बढ़ने की कोशिश कम लोग ही कर पाते हैं.” मीता ने तसल्ली दी.
 “शुक्रिया. आपकी बात से मुझे हौसला मिला है..”उसने हिन्दी में कहा.
“क्या तुम हिन्दी बोल सकते हो?”मीता का कौतूहल बढ़ता ही जा रहा था.
‘थोड़ी सीख रहा हूँ. अभी ज़्यादा नहीं सीख पाया हूँ, पर एक दिन अच्छी हिन्दी बोल सकूंगा.”
 “तुम हिन्दी क्यों पढ़ना चाहते हो?”
“मेरे बाबा हिन्दुस्तान में बहुत साल रहे थे. उनसे इंडिया की इतनी बातें सुनी हैं कि मुझे भी एक बार हिन्दुस्तान ज़रूर जाना है.”
“इंडिया में तो लोग अंग्रेज़ी भी जानते-बोलते हैं. तुम बिना हिन्दी सीखे भी तो जा सकते हो>”
“नहीं, मेरा सोचना है, जिस देश में जाओ वहां की भाषा ज़रूर आनी चाहिए. आप क्या अंग्रेज़ी के बिना इस देश में आकर सम्मान पा सकतीं?”
मीता अनुत्तरित रह गई. इतना ज़रूर समझ गई, इस रिचर्ड नाम के इंसान के अंतर में कुछ कर गुजरने की आग है. वह सामान्य से कुछ अधिक ज़रूर है.
 “नहीं मुझे खुशी है, तुम मेरे देश की भाषा सीखना चाहते हो.”
“अगर आप चाहें तो मै रोज़ आपको अपनी टैक्सी से कॉलेज ले जा सकता हूँ.”
“नहीं रिचर्ड, अभी रोज़ टैक्सी में आना-जाना अफोर्ड नहीं कर सकती. आज की तरह जब कभी ज़रुरत होगी तुम्हे ज़रूर बुलाऊंगी.’
“आप मुझे बस का ही पेमेंट करना, मै ने रामायण और गीता अंग्रेज़ी में पढी है, उन्हें हिन्दी में पढ़ना चाहता हूँ. आप हेल्प करेंगी न?”चेहरे पर उत्सुकता स्पष्ट थी.
मुझे खुशी है कि तुम्हें हिन्दी भाषा और हमारी पुस्तकों में रूचि है, पर अपनी भाषा सिखाने के लिए पैसे नही ले सकती ना ही तुम्हें बस का किराया दे कर तुम्हारा नुक्सान कर सकती हूँ.”
“बाबा ठीक कहते थे, हिन्दुस्तानी दिल से काम लेते हैं इसीलिए सेंटीमेंटल होते हैं. हम अमेरिकन प्रैक्टिकल होते हैं प्लीज़ मेरी शर्त मान लीजिए, मेरा कोई नुक्सान नहीं बल्कि फायदा ही होगा.”
मीता को सोच में डूबा देख रिचर्ड ने कहा-
“कल किस टाइम क्लास है, तैयार रहिएगा .कल से आपको डिपार्टमेंट पहुंचाने-–लाने की ज़िम्मेदारी मेरी है. अब आप मेरी रिक्वेस्ट मान लीजिए प्लीज.”
 “ठीक है कल आठ बजे जाना है. जल्दी पहुँच कर लाइब्रेरी में कुछ पढ़ सकती हूँ.”
“थैंक यू, ठीक वक्त पर पहुँच जाऊंगा.”
अपार्टमेन्ट पहुंची मीता सोच में पड़ गई, है? एक टैक्सी-ड्राइवर से पहले दिन ही इतनी बातें करना और उसकी शर्त मान लेना क्यों संभव हुआ. इंडिया में तो टैक्सी-ड्राइवर हमेशा संदेह के दायरे में रहते हैं. एक बात तो ज़रूर थी, वह काफी पढ़ा-लिखा और बुद्धिमान लगता है. कल राजीव और नीरा से बात करने की सोच कर मीता सो सकी थी.
दूसरी सुबह डोर-बेल सुन कर मीता ने दरवाज़ा खोला था.
“नमस्ते, मै नीचे वेट कर रहा हूँ.”रिचर्ड के चेहरे पर खिली मुस्कान थी.
“ठीक है आती हूँ. एक कप चाय पी लूं देर तो नहीं होगी?”
“आप अपना टाइम लीजिए, कोई जल्दी नहीं है.”इतना कह कर वह चला गया.
मीता के दिल में आया उसे भी चाय ऑफर कर दे, पर अपने सोच को झटक जल्दी से चाय खत्म कर बाहर आ गई. उसे देख, रिचर्ड टैक्सी से बाहर आ गया और मीता के लिए पीछे का दरवाज़ा खोल दिया.
. “आपके साथ हिन्दी में बात करने की कोशिश करूंगा मै जल्दी से जल्दी हिन्दी सीखना चाहता हूँ.”
‘इतनी जल्दी की कोई वजह है, रिचर्ड?”उसकी उतावली पर मीता ने जानना चाहा.
“मुझे इंडिया जा कर अपनी ग्रैंड माँ की कब्र पर बाबा की और से लाल गुलाब चढाने हैं. बाबा इंडिया नहीं जा सके थे, पर मुझसे अपनी विश बताई थी मुझे बाबा की लास्ट विश पूरी करनी है.”
.”मुझे खुशी है, अमरीकी होते हुए भी तुम अपने बाबा-दादी की इच्छा का सम्मान करते हो.”
“आपने ये कैसे समझ लिया अमरीकियों के सेंटीमेंट्स नहीं होते?”
“सौरी, मेरा ऐसा मतलब नहीं था..’मीता को अपनी गलती समझ में आ गई.
“शाम को जब फ्री हो जाएं कॉल कर लीजिएगा. शाम को मै इधर ही होता हूँ.”.
शाम को मीता राजीव के घर जा पहुंची. उसे देख कर नेहा मीता से लिपट गई. नीरा ने भी प्यार से कहा जब से मीता अपने अपार्टमेन्ट में शिफ्ट हो गई, घर खाली लगने लगा है.
“कहो मीता, कॉलेज कैसा चल रहा है, बस तो आसानी से मिल जाती है?’राजीव ने पूछा.
उत्तर में मीता ने रिचर्ड के बारे में बता कर कहा-
“रिचर्ड कोई सामान्य टैक्सी-ड्राइवर नहीं लगता, उसकी नॉलेज देख कर लगता है जैसे वह कोई और व्यक्ति है, सिर्फ टैक्सी-ड्राइवर नहीं है.”
“हो सकता है, यहाँ कॉलेज की पढाई बहुत महंगी होती है बहुत से स्टूडेंट्स पार्ट-टाइम जॉब कर के पढ़ते हैं. अक्सर एजुकेशन-लोंन के क़र्ज़ को उतारने के लिए भी उन्हें पढाई के साथ कोई काम करना होता है. वक्त मिलने पर इस रिचर्ड के बारे में पता करूंगा.”राजीव ने कहा.
. डिनर के बाद सबके साथ आइसक्रीम खा कर वापिस लौटी मीता खुश थी.
दूसरी सुबह मीता समय से पहले ही बाहर आ गई. अपार्टमेंट के सामने छोटा सा पार्क था, कुछ देर खुली हवा में घूमने से ताजगी मिलती है. अचानक् उसकी निगाह पार्क के कोने में एक बेंच पर बैठे रिचर्ड पर पड़ी थी. गोद में लैप- टॉप लिए रिचर्ड की उंगलियाँ तेज़ी से कुछ टाइप कर रही थीं. विस्मित मीता चुपके से रिचर्ड के पीछे जा खड़ी हुई. मीता ने पढ़ा रिचर्ड के नाम के साथ एम एस, कम्प्यूटर सांइंस लिखा हुआ था. वह कोई फाइनल रिपोर्ट सबमिट कर रहा था.
“अच्छा तो तुम ये रिचर्ड ब्राउन हो. मुझसे सच क्यों छिपाया, रिचर्ड? इतना तो समझ गई थी तुम कोई साधारण टैक्सी ड्राइवर नहीं हो, पर तुम कम्प्यूटर सांइंस में मास्टर्स कर चुके हो, ये नहीं पता था..”
“ओह, आप? सॉरी, सोचा था, जब इस रिपोर्ट का रिज़ल्ट आ जाएगा, तब अपने बारे में बता सकूंगा मेरे डिपार्टमेंट के हेड को विश्वास है मेरी यह प्रोजेक्ट मेरा सपना पूरा कर सकेगी.”
“मुझे यकीन है तुम्हारे हेड का कथन सच होगा. माफ़ करना, रिचर्ड, तुम्हें एक टैक्सी-ड्राइवर समझती रही. वैसे तुम्हारी बातें हमेशा विस्मित करती रहीं.”मीता ने सच्चाई से कहा.
“मुझसे माफी मांग कर शर्मिंदा न करें. अगर मंजूर है तो आज से मुझे अपना दोस्त स्वीकार कर लें.”
“ज़रूर, आज से हम दोस्त हुए. अब चलें, तुम्हे अपनी प्रोजेक्ट भी तो सबमिट करनी है. अब तुम मुझे मीता जी नही, सिर्फ मीता कहना. वैसे भी तुम कम्प्यूटर सांइंस में मास्टर्स पूरा कर चुके हो और मै अभी एम् बी ए कर रही हूँ तो तुम मुझसे सीनियर हुए न.”.
“अब जल्दी ही मुझे अपने लिए कार खरीदनी होगी, आप ने कहा था आप ड्राइविंग सीखना चाहती हैं. अपनी कार पर आपको ड्राइविंग  सिखाऊँगा..”रिचर्ड मुस्कुरा रहा था.
“सच, मुझे ड्राइविंग सिखाओगे.” मीता की आवाज़ में उत्सुकता थी
“अपनी दोस्त के लिए इतना करना तो मेरा फ़र्ज़ है. मीता.” रिचर्ड ने एक गहरी दृष्टि मीता पर डाळी थी.
एक सप्ताह बाद कॉलेज जाने के लिए बाहर आई मीता यलो कैब की जगह एक सफ़ेद कार देख कर सोच में पड़ गई तभी खुशी से उमगते रिचर्ड ने एक लाल गुलाब मीता को देते हुए कहा-
 “मेरा सपना सच हुआ, मीता. मुझे अपने डिपार्टमेंट में लेक्चरार का जॉब मिल गया. मेरी प्रोजेक्ट को इंटरनेश्नल सेमीनार में प्रेजेंट किया जाएगा. अभी तो बस ये पहला कदम है, मुझे बहुत आगे जाना है.”
“बधाई, रिचर्ड, तुम्हारी सफलता पर मुझे गर्व है.”गुलाब लेती मीता ने कहा.
“एक दिन आपने कहा था, मेहनत करने वाला आकाश छू सकता है, शायद वो बात मेरी इंस्पिरेशन बन गई. तभी इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था. कब सोचा था, एक चर्च के ऑरफ़ेनेज में पला-बढ़ा एक दिन ये रिचर्ड, इतना कुछ पा सकेगा.”
“तुमने कभी अपने बारे में कुछ नहीं बताया, क्या तुम्हारे पेरेंट्स नहीं रहे, इसलिए चर्च के अनाथाळय में रहना पडा?” मीता सहानुभूतिपूर्ण थी.
“मै एक ब्रोकेन फैमिली की औलाद हूँ, मीता. ब्लैक पापा और अमरीकी मॉम की बेमेल शादी किसी तरह ग्यारह साल तक चली फिर एक दिन मुझे अकेला छोड़ कर दोनों ने अपनी अलग दुनिया बसा ली. चर्च के फादर ने ही मुझे सही राह दिखाई है.”
“मुझे तुम्हारे लिए दुःख है, रिचर्ड, पर खुशी है कि तुमने परिस्थितियों से हार नहीं मानी.”
दिन बीत रहे थे रिचर्ड और मीता साथ में अब काफी सहज महसूस करते थे. मीता की पढाई सुचारू रूप में चल रही थी और रिचर्ड अपने विद्यार्थियों के बीच बहुत पॉपुलर होता जा रहा था. अपने वादे  के अनुसार रिचर्ड ने मीता को ड्राइविंग सिखानी शुरू की थी. स्टीयरिंग व्हील को साधने के प्रयास में कार टेढ़ी- मेढी  हो जाती, पर रिचर्ड के सबल हाथ मीता को ठीक राह पर ले आते. रिचर्ड का स्पर्श मीता को रोमांचित कर जाता. देर तक मीता उस स्पर्श को महसूस करती रहती..
जिस दिन रिचर्ड को फर्स्ट सैलरी मिली, वह बहुत खुश था. कार मीता के घर की ओर न मोड़ एक शानदार रेस्तरा के सामने रोकी थी. मीता के लिए कार की डोर खोलते रिचर्ड से मीता ने सवाल किया-
“हम यहाँ क्यों रुके हैं, रिचर्ड, कहीं आज तुम्हारा बर्थ डे तो नहीं है?”मीता ने मज़ाक किया.
“मुझे जन्म देने वाले ही अनाथ बना कर छोड़ गए फिर कैसा बर्थ डे? आज तुम हो, मेरी खुशी साथ है.”
रेस्तरा में काफी युवक और युवतियां थीं. हळ्की रोशनी में म्यूजिक से रोमांटिक माहौल बन रहा था. रिचर्ड के साथ मीता का ऎसी जगह आने का पहला ही अवसर था.
“अब बताओ. हम आज यहाँ क्यों आए हैं?” मीता ने बैठते ही सवाल किया.
“आज मुझे फर्स्ट सैलरी मिली है, तुम्हारे अलावा मेरा कोई अपना नहीं, जिसके साथ अपनी खुशी बाँट सकूं.” रिचर्ड उदास था.
“नाओ  चीयर अप, रिचर्ड, सोचो तुम ज़िंदगी में सफल रहे, अपना सपना पूरा किया है.”
“ठीक कहती हो, मीता. बताओ डिनर में क्या लोगी?”
दोनों के पास वाली टेबिल पर दो हिन्दुस्तानी युवक जम कर ड्रिंक कर रहे थे. उनकी निगाहें मीता और रिचर्ड पर थीं. एक ने नशे में आवाज़ लगाई-
“ऐ यूं टैक्सी ड्राइवर यहाँ आने की तेरी हिम्मत कैसे हुई? जानता नहीं इस रेस्तरा में सूट- टाई वाले बड़े लोग आते हैं.”
 “ हे,मिस, ये इंसान आपके स्टेटस का नहीं है. आओ हमारे साथ एंज्वाय करो.”दूसरा मीता की तरफ बढ़ा था. दोनों की आवाजें लड़खड़ा रही थीं.
जैसे ही उस शराब में धुत्त युवक ने मीता का हाथ पकड़ना चाहा, रिचर्ड ने उसका हाथ झटक कर उसे मीता से दूर करना चाहा. यह देख दूसरा युवक आकर रिचर्ड पर मुक्के बरसाने लगा. रिचर्ड ने जवाब में उन्हें रोकने की कोशिश की, तभी पहले युवक ने खाली बोतल रिचर्ड के सर पर दे मारी. रिचर्ड के माथे से खून निकालने लगा. यह देख कर रेस्तरा में खलबली मच गई. कुछ लोगों ने दोनों को रोका और रिचर्ड को हॉस्पिटल पहुंचाया. घबराई मीता रिचर्ड के साथ बैठी उसके माथे से बहते खून को अपनी साड़ी के आँचल से पोंछ रही थी.
रिचर्ड का घाव साफ कर के बैंडेज कर दी गई. डॉक्टर की राय थी रिचर्ड को रात में हॉस्पिटल में ऑब्जरवेशन के लिए रखा जाएगा. रिचर्ड के लाख कहने पर भी मीता घर लौटने को तैयार नहीं हुई. उसी के कारण रिचर्ड घायल हुआ था, रिचर्ड की चोट से मीता की आँखें छलछला आईं.
.’सौरी, मीता. तुम्हारी आज की शाम बर्बाद हो गई., देखा मेरा लक, मुझे किसी के साथ खुशी बांटने का भी हक़ नहीं है. तुम तो ठीक हो न?” दुखी आवाज में रिचर्ड ने कहा.
“तुम बच गए, रिचर्ड, इससे ज्यादा मेरी और क्या खुशी हो सकती है. वो गुंडे कुछ भी कर सकते थे.”
पूरी रात रिचर्ड की बेड के पास बैठी मीता जागती रही. मीता का हाथ किसी अवलम्ब की तरह पकडे रिचर्ड सो गया. मीता का मन रिचर्ड के लिए करुणा और प्यार से भरा आ रहा था. कितना अकेला है, रिचर्ड. इस समय बस मीता ही जैसे उसकी सब कुछ थी.
हॉस्पिटल से वापिसी के समय मीता रिचर्ड को जिद करके अपने घर ले गई. वीकेंड के कारण दोनों का अवकाश था. मीता को पूरी लगन और प्यार से अपनी सेवा करते देखना, रिचर्ड के लिए एक अनुभव था.
“सोचता हूँ मै ऐसे ही चोट खाता रहूँ या बीमार हो जाऊं ताकि तुम हमेशा इसी तरह मेरे पास रहो.”
“अब अगर ऎसी बातें की तो अभी तुम्हें तुम्हारे घर भेज दूंगी. “मीता ने रोष दिखाया.
दोनों अब जैसे एक-दूसरे की ज़रुरत बन गए थे. एक-दूसरे का साथ उन्हें अच्छा लगता. मीता के हाथ का बना हिन्दुस्तानी खाना रिचर्ड को बहुत अच्छा लगता. रिचर्ड अब काफी हिन्दी समझने और बोलने लगा था. रिचर्ड के साथ मीता अपने को पूर्ण पाती और यही बात रिचर्ड के साथ भी सच थी.
राजीव सपरिवार एक माह के लिए इंडिया गया हुआ था. राजीव के परिवार की अनुपस्थिति में भी रिचर्ड के कारण अब मीता को अकेलापन नहीं खलता था. दोनों के बीच एक मीन प्रेम मुखर था. रिचर्ड की गहरी प्यार भरी दृष्टि मीता को अन्दर तक गुदगुदा जाती. रिचर्ड कहता-
“कभी नहीं सोच सका था, एक दिन कोई लड़की मेरे बेरंग जीवन में आ कर उसे खुशियों से रंग देगी.”
“सच कहो, रिचर्ड क्या तुम्हारा किसी लड़की के साथ अफेयर नहीं हुआ? यहाँ तो गर्ल-फ्रेंड मिलना बिलकुल मुश्किल नही है.’
“अपनी समस्याओं के बीच कभी और कुछ सोच ही नहीं सका और सच कहूं तो तुम्हे देख कर लगा तुम में सीता की सादगी और सच्चाई है. बस मेरा मन तुमने बाँध लिया.
“लेकिन मुझे तो तुम राम जैसे कतई नहीं लगे.”मीता ने परिहास किया.
“ठीक है, राम-सीता न सही रिचर्ड और मीता का साथ भी जमेगा.”दोनों हंस पड़े..
अचानक एक दिन रिचर्ड को मीता के डिपार्टमेंट से फोन आया था-
“मिस मीता अचानक बेहोश हो गई हैं, उन्हें क्वीन मेरी हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है. उनके मोबाइल पर आपके नंबर थे इसलिए आपको इन्फौर्म कर रहे हैं.”
बदहवास रिचर्ड तेज़ स्पीड में कार चला कर हॉस्पिटल पहुंचा था. मन में न जाने कितने ख्याल आ रहे थे. एलीवेटर की प्रतीक्षा न कर वह सीढियां फळांगता मीता की बेड के पास पहुंचा था. शायद उसके पांवों की आहट की ही मीता को प्रतीक्षा थी. आँखें खोलते ही रिचर्ड को देख मीता के ओंठों पर हलकी सी मुस्कान आ गई.  मीता के हाथ को उठा हथेली पर चुम्बन अंकित कर प्यार से पूछा था;
“कैसी हो मेरी मीत? मेरी तो जान ही निकल गई थी अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो मै जी नहीं पाता”
“इस लड़की को इतना प्यार करते हो, लकी गर्ल.” पास खड़ी नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा.
“यस नर्स, आज जान पाया, ये लड़की मेरी ज़िंदगी में क्या जगह रखती है, कोई सीरियस बात तो नहीं है?”शब्दों में रिचर्ड की चिंता स्पष्ट थी.
“परेशान मत हो, इसे कोई स्ट्रेस रहा होगा. एक्जाम पास आने पर अक्सर स्टूडेंट्स को ऐसा हो जाता है.”
मीता कभी सोच भी नही सकी थी अनजाने ही वह रिचर्ड पर कितना निर्भर हो गई थी. बेहोशी खुलते ही उसके मन में बस रिचर्ड का ही ख्याल आया था. रिचर्ड को सामने देख जैसे वह जी गई थी. उसके लिए रिचर्ड कुछ भी करने को तैयार रहता था. हमेशा कहता–
’तुम मेरी प्रेरणा हो. तुम्हारे साथ ने मुझे आकाश की ऊंचाइयां छूने की हिम्मत दी है. अब मै अकेला नहीं हूँ, तुम मेरे साथ हो. बचपन के उदासी भरे दिन भूल कर जैसे नई खुशियाँ मिल गई हैं..’
डॉक्टर ने मीता को आराम करने की सलाह दी थी रिचर्ड ने मीता को इस सावधानी से कार में बैठाया मानो वह कांच की गुडिया हो जो ज़रा सा हिलते ही टूट जाएगी. मीता के घर पहुँच मीता को बेड तक उसी सावधानी से सहारा दे कर ले गया. उसे परेशान देख मीता ने कहना चाहा-
“तुम बेकार परेशान हो रहे हो. अब मै बिलकुल ठीक हूँ,.”
“देखो मीता, अब तुम अपनी ज़िंदगी से इस तरह खिलवाड़ नहीं कर सकतीं. तुम्हारी ज़िंदगी पर मेरा भी अधिकार है. अब तुम बस आराम करो, मै तुम्हारे लिए गर्म कॉफी लाता हूँ.”
 “रिचर्ड, अब तुम घर जाओं, कल तुम्हे क्लास भी लेना है.”
“आज रात तुम्हें छोड़ कर नहीं जा सकता. मुझे जमीन पर सोने की आदत है, यहीं नीचे सो जाऊंगा.”बात खत्म करते रिचर्ड ने एक मैट्रेस ज़मीन पर बिछा ली और आराम से लेट गया.
“तुम ज़मीन पर सोओ, मुझे ये अच्छा नहीं लग रहा है, प्लीज़ तुम घर जाओ.”मीता ने विनती सी की.
“बड़ी गहरी नींद आ रही है, डोंट डिस्टर्ब मी.”
 मीता की आँखों से नीद कोसों दूर थी. ये क्या हो रहा है, उसके दिल में ज़मीन पर सो रहे रिचर्ड के लिए ढेर सारा प्यार उमड़ रहा था. अपने घर-परिवार से हज़ारों मील दूर ये अजनबी कैसे उसका इतना अपना  हो गया था. उसे याद आ रहा था, पहले ही दिन मीता ने उसमे कुछ अनोखा देखा था. उसका बचपन कितना दुखद था, पर उसने अपने को टूटने नहीं दिया. बचपन के सुहाने मस्ती भरे दिनों में वह अपने को स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहा था. आज वह एक सफल कम्प्यूटर-विशेषज्ञ है. सुगठित शरीर के साथ उसका सौम्य चेहरा कितना निष्पाप दिखता है. उसे पाकर कोई भी लड़की अपना भाग्य सराहेगी. अचानक मीता चौंक गई. क्या उसके पेरेंट्स रिचर्ड को अपना दामाद स्वीकार कर सकेंगे?
अचानक डोर-बेल बज उठी इतनी रात में कौन आ सकता है? डोर-बेल लगातार बज रही थी. रिचर्ड उठ कर बैठ गया. मीता भी उठ गई. उसकी आँखों में भय था.
“डरो मत, मीत, मै देखता हूँ.” दरवाज़ा खोलते ही एक पुरुष के साथ एक स्त्री खड़ी थी. साथ में एक सूटकेस भी था.
“आप कौन, इस समय यहाँ किसके पास आए हैं?”’
“मीता, ये मीता का ही घर है न?”पुरुष ने कड़ी आवाज़ मे पूछा.
“जी हाँ, आज उनकी तबियत खराब है. आप उन्हें कैसे जानते हैं?”रिचर्ड की बात का जवाब दिए बिना पुरुष और स्त्री तेज़ी से घर में प्रविष्ट हो गए.
“पापा-मम्मी आप यहाँ, अचानक, सब ठीक तो है?” मीता पूरी तरह  से जाग चुकी थी.
“सब ठीक क्या ख़ाक होगा?’हम तो समझते थे तू यहाँ पढाई कर रही है,पर तू तो यहाँ हमारे खानदान का नाम डुबो रही है. शर्म नहीं आती इस आवारा के साथ एक कमरे में रह रही है.”मीता के पापा दहाड़ै.
“आप गलत समझ रहे हैं, पापा. रिचर्ड आवारा नही, यूनीवर्सिटी में प्रोफ़ेसर है. आज मुझे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था, रिचर्ड मेरी मदद के लिए यहाँ रुका है.’ मीता ने सफाई देनी चाही.
“बकवास बंद कर, तेरे लच्छन हमें इंडिया में ही पता लग गए थे. भला हो राजीव का उसने हमारी आँखे खोल दीं, कैसे तू यहाँ एक टैक्सी ड्राइवर के साथ प्रेम की पींगे बढ़ा रही है. हम तुझे वापिस ले जाने भागे आए हैं.”माँ की आँखें क्रोध से लाल हो उठीं थी
“अच्छा तो राजीव ने आधी-अधूरी जानकारी दे कर आपको भड़काया है. राजीव तो जानते थे रिचर्ड अब प्रोफ़ेसर है, उन्होंने ही मुझे समझाया था, पढाई का क़र्ज़ चुकाने के लिए यहाँ रिचर्ड की तरह बहुत से स्टूडेंट्स पार्ट-टाइम जॉब करते हैं.”
”प्लीज़ आप लोग शांत हो जाइए. हमने कोई गलत काम नहीं किया है. हम दोनों एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं” पूरी बात न समझ पाने पर भी रिचर्ड ने कहना चाहा
“शट- अप एंड गेट आउट..पापा ने तेज़ आवाज़ में धमकाया.
“रिचर्ड तुम चले जाओ. तुम्हारा अपमान और नहीं सह सकती.”
“पर मीता, मुझे एक्सप्लेन करने दो, मै यहाँ क्यों रुका था.”
“कोई फायदा नहीं होगा, ये लोग अभी कुछ सोचने-समझने की स्थिति में नही हैं. मुझे बात करनी होगी. मुझ पर यकीन रखना, रिचर्ड.”
“इसी शर्त पर जा सकता हूँ कि तुम इन लोगों द्वारा इमोशनली ब्ळैक मेल करने की कोशिश या धमकाने से मुझे छोड़ कर नहीं जाओगी. तुम्हें मेरे प्यार की सौगंध है, मीता. वादा करो, किसी भी हालत में कमज़ोर नहीं पडोगी, मै तुम्हारे साथ हूँ और हमेशा रहूँगा.”
.”वादा करती हूँ, रिचर्ड, मै तुम्हारी हूँ. तुम अपने को और अपमानित मत होने दो. प्लीज़ जाओ.”
मीता पर एक दृष्टि डाल, रिचर्ड बाहर चला गया. उसके चेहरे पर परेशानी साफ़ झलक रही थी.
उसके जाते ही पापा और माँ ने मीता पर अपशब्दों की बौछार कर दी.मीता के आंसुओं का उन पर कोई असर नहीं हुआ. उनकी उस मन::स्थिति में कुछ भी समझा पाना असंभव था.
“बहुत हो गया अपना सामान पैक कर और हमारे साथ चलने की तैयारी कर.”
“पापा मेरा एम बी ए कैसे कम्प्लीट होगा? प्लीज़ मेरी बात तो सुन लीजिए.”
‘मुझे कुछ नहीं सुनना है, बहुत पढाई कर ली.”पापा ने अपना निर्णय सुना दिया.
“मै ने सोचा नहीं था मेरी कोख से ऎसी कुलच्छनी जनम लेगी. एक टैक्सी-ड्राइवर के साथ प्यार कर बैठी है जिसके माँ-बाप तक का पता नहीं है.”.माँ कोस रही थी.
“मम्मी पहली बात तो यह है कि रिचर्ड टैक्सी ड्राइवर नहीं है, प्रोफ़ेसर है. दूसरी बात यहाँ टैक्सी-ड्राइवर को भी इज्ज़त की निगाह से देखा जाता है. ख़ास बात यह कि हम दोनों प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं.”.मीता ने साहस के साथ अपनी बात सामने रख दी.
“क्या, तेरी यह हिम्मत. ऎसी बात करते शर्म नहीं आती? अपने समाज में हम मुंह दिखाने के भी लायक नहीं रहेंगे.”पापा चिल्लाए.
 “नहीं सच बात कहते मुझे शर्म नहीं आती. मै बालिग़ हूँ, आप मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे साथ ज़बरदस्ती नही कर सकते, रिचर्ड ने बहुत दुःख झेले हैं अब उसमे आत्मविश्वास आया है, अपनी वजह से उसे टूटने या बिखरने नहीं दे सकती.” दृढ स्वर में मीता ने कहा.
“तेरी यह मजाल, मेरे साथ जुबान लड़ाती है. इसी दिन के लिए पाल-पोस कर बड़ा किया था.”थप्पड़ मारने को पापा के उठे हाथ को मीता ने रोक दिया.
“अगर मै चाहूँ अभी 911कॉल कर दूं, मुझे धमकाने या मारने की कोशिश में पुलिस आपको जेल भेज सकती है. ये अमरीका है, हिदुस्तान नही जहां लड़की की मर्जी का कोई मूल्य नही होता.”
“क्या तू अपने पापा को जेल भेजेगी? अमरीका आकर यही पढाई की है. दूसरों के सामने हम कैसे मुंह दिखाएंगे.”अब माँ विस्मित और क्षुब्ध थी, क्या ये उसकी कोख जाई बेटी है.
“किन दूसरों की बात कर रही हो माँ? वो जिनके अपने घर शीशे के होने के बावजूद दूसरों के घर पत्थर फेंकने की हिमाकत करते हैं. अपने जन्मदाता माता-पिता का अपमान करूं, ये अपराध नहीं कर सकती,  पर ये सच है यहाँ आ कर जाना है, एक बालिग लड़की को अपना जीवन- साथी चुनने का पूरा अधिकार है, उस पर दूसरों की मर्जी नहीं थोपी जा सकती.” शान्ति से मीता ने कहा..
“क्या माँ-बाप बेटी के दुश्मन होते हैं, वे भी तो बेटी का भला ही चाहते हैं.”माँ ने गुस्से से कहा.
“भूल गईं, चाचा जी की बेटी कला दीदी की ऊंचे खानदान में शादी की गई थी, पर दहेज़ के लालच में उन्हें जला कर खत्म कर दिया गया था.”
“माँ-पापा को मौन देख मीता ने अपना मोबाइल उठा कर रिचर्ड को फोन लगाया-
“रिचर्ड क्या तुम मेरे साथ शादी करने के लिए सीरियस हो? मुझे तुम्हारा पक्का जवाब सवेरे सात बजे तक मिल जाना चाहिए. पूरी तरह से सोच-समझ कर फैसला लेना.”
‘सवेरे सात बजे तक का इंतज़ार क्यों, मेरा पक्का जवाब अभी तैयार है. हाँ मै तुमसे सिर्फ तुमसे शादी करूंगा वरना ज़िंदगी भर अविवाहित रहूँगा. बोलो इसको सिद्ध करने के लिए मुझे क्या प्रमाण देना होगा?” दूसरी और से रिचर्ड कीं उत्साहित आवाज़ स्पष्ट सुनाई दी.
“तुम्हे प्रमाण देने की कोई ज़रुरत नहीं है, रिचर्ड. अगर तुम तैयार हो तो. हम कल ही चर्च में शादी करेंगे. उम्मीद है तुम्हारे चर्च के फादर हमारी शादी में मदद करेंगे तुम अपने और मेरे क्लास के साथियों को भी इन्फौर्म कर देना. मै ठीक वक्त पर पहुँच जाऊंगी.”
“पागल हो गई है, इस देश में रोज़ शादी और रोज तलाक होते हैं, रिचर्ड, जिसके माँ-बाप तक उसे छोड़ गए उसका क्या भरोसा?”माँ ने आँखों से आँचल लगा लिया.
“मुझे रिचर्ड पर पूरा विश्वास है, वह तकलीफों की आग और कड़ी धूप में तप कर खरा सोना बना है. उस पर आँख मूँद कर यकीन कर सकती हूँ.” अपने साहस पर शायद मीता खुद भी विस्मित थी..
पापा मौन थे, कुछ समय अमरीका में रहने के कारण  वह अमरीका और भारत के बीच का अंतर जानते  थे. परिस्थिति की गंभीरता वह समझ रहे थे. उन्हें अच्छी तरह से पता था एक बालिग़ लड़की से जबरन कुछ करवा पाना मुश्किल बात थी. मीता ने झूठ नहीं कहा था, 911 डायल करते ही घर में पुलिस आ जाएगी और फिर उनकी नहीं सुनी जाएगी. मीता का साथ देने को यहाँ की युवा पीढी सामने आ जाएगी. उनका साथ देने वाला यहाँ कौन है? अब जब लड़की ने ठान ही ली है तो उसकी बात मान लेने में ही भलाई है. शादी एक जुआ ही तो है,. कला के दुखद अंत को भुलाया नहीं जा सकता. शायद मीता ठीक कह रही है.
“मेरी आप दोनों से विनती है, अगर संभव हो शादी में सम्मिलित हो कर हमें आशीर्वाद दीजिए. आपके आशीर्वाद के बिना हमारी शादी अधूरी रहेगी मेरा विश्वास कीजिए, रिचर्ड बहुत अच्छा इंसान है. जाति  और धर्म से ज्यादा बड़ी चीज इंसानियत है.”पापा को सोच में पडा देख मीता ने कहा.
“तू कैसे कह सकती है, रिचर्ड तुझे धोखा नहीं देगा?”पापा ने आखिरी सवाल पूछा.
“रिचर्ड सेल्फ मेड इंसान है. पापा आपने भी तो जीवन में बहुत संघर्ष झेला है और ऐसे लोगों की आप इज्ज़त करते रहे हैं. मुझे रिचर्ड की ईमानदारी और अपने प्रति उसके प्यार पर पूरा भरोसा है. आपकी बेटी गलत निर्णय नहीं ले सकती.”पूरे विश्वास से मीता ने कहा.
“बचपन से तेरी जिद पूरी करता आया हूँ, अब ये आखिरी जिद भी माननी ही पड़ेगी.”पापा ने कहा.
.”थैंक यूं पापा.”खुशी से मीता पापा के गले से लिपट गई.
अकस्मात् लिए अपने फैसले पर मीता को विश्वास कर पाना कठिन लग रहा था, उसमें कहाँ से ये फैसला करने का साहस आ गया था. उसने तो इस हिम्मत की कल्पना भी नहीं की थी. नहीं शायद इस स्थिति का सामना करने के लिए वह मन ही मन अभ्यास करती रही है और आज अकस्मात् ही उसने अपना फैसला सुना डाळा था. उससे भी ज़्यादा पापा की स्वीकृति विस्मित कर रही थी. निश्चय ही जीवन में पहली बार ऐसा साहसी निर्णय वह रिचर्ड और अपने प्यार के कारण ही ले सकी थी रिचर्ड ने ठीक कहा था राम और सीता की न सही, रिचर्ड और मीता की जोडी तो जमेगी. ये बात याद करती मीता के ओंठों पर मीठी मुस्कान तिर आई.

अकस्मात् लिए अपने फैसले के बाद मीता को अब एक नई सुबह की उत्सुकता से प्रतीक्षा थी.

धूप – छाँव

“मम्मी, आज लंच के लिए मेरा एक फ्रेंड आ रहा है’. पिछले दो महीने से काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था.” मोबाइल सुन कमल ने माँ से कहा.
‘अरे पहले से क्यों नहीं बताया. इतनी जल्दी क्या तैयारी करू?”. विभा परेशान हो गई.
‘तैयारी क्या करनी है, वो कोई वी आई पी थोड़ी है. सबसे आसान है अपना यलो पुलाव यानी तहरी बना लो. आलू-मटर और गोभी तो होगी ही.’ कमल ने समाधान दे दिया.
‘तहरी भी भला मेहमान को खिलाई जाती है. तुझे पसंद है इसका मतलब ये नहीं, तेरा दोस्त भी चावल की तहरी पसंद करे.’ विभा ने नाराज़गी दिखाई.
‘तुम बेकार में परेशान हो रही हो, मम्मी जयकुमार आधा हिन्दुस्तानी है. उसके पापा भारतीय थे इसलिए जैकी अच्छी हिन्दी बोल और समझ लेता है. उसे मैं अच्छी तरह से जानता हूँ. इन्डियन रेस्तरा में मेंरे साथ खाते हुए मेरी पसंद उसकी पसंद बन गई है. एक बात और अपनी आदत के अनुसार उससे उसके माँ -बाप के बारे में पूछना मत शुरू कर देना. ज़्यादा बात करने की तुम्हारी आदत है, इसीलिए कह रहा हूँ.  
‘क्यों. किसी के माँ-बाप के बारे में. जानना गलत बात है? विभा की आवाज़ में तल्खी थी.
‘जिसके माँ-बाप ही न हों उससे उनके बारे में. पूछना क्या ठीक बात होगी. अनाथ न होते हुए भी उसने अनाथ का जीवन जिया है. उसके पेरेंट्स काफी पहले ही अलग हो गए. उन दोनों ने तो अपनी अलग दुनिया बसा ली, पर जैकी अकेला छोड़ दिया गया.
‘ओह, बेचारा लड़का, पर ये बता बिना माँ-बाप के वह कम्प्यूटर इंजीनियरिंग कैसे कर रहा है? यहाँ तो पढाई बहुत महंगी है.”’विभा विस्मित थी.
‘अमरीका के लिए ये कोई अचरज की बात नहीं है. यहाँ स्कूल-कालेज की पढाई के लिए अधिकतर स्टूडेंट खुद काम करके फीस जुटाते है. जैकी ज़हीन था, पढ़ने की इच्छा के कारण दूसरों की कारें धोकर, घरों में अखबार देकर, ट्यूशन पढ़ा कर वह यहाँ तक पहुंचा है. एम् एस में टॉप किया है. अब स्काळरशिप पाकर पीएच.डी कर रहा है. हेड का फेवरिट है.’
“तू तो अभी एम्.एस कर रहा है फिर वह तेरा दोस्त कैसे हुआ?
“मुझे टीचिंग असिस्टेटशिप मिली है. जैकी मेरा सीनियर है, कभी कोई कठिनाई होने पर उसकी मदद लेता था. बस हम दोनों एक-दूसरे के पास आते हुए दोस्त बन गए. उसने अपना दुखद अतीत मेरे साथ बांटा है, मम्मी ”
‘यहाँ की बातें सुनती हूँ तो आश्चर्य होता है. मुझे तो यहाँ. की ज़िंदगी रास नहीं आती, ऎसी बातें जान-सुनकर लगता है यह ठीक ही कहा जाता है कि भारत महान है.’
‘अभी तुम यहाँ दो ही महीनों से आई हो, ज़्यादा दिन रहोगी तो अमरीका ही अच्छा लगने लगेगा.अब बाते ही करती रहीं तो तुम्हारी तहरी की जगह हमें लंच के लिए किसी रेस्तरा में जाना होगा.” कमल ने परिहास किया.
किचेन में पहुँच विभा ने फ्रिज से गोभी- मटर निकाली तो चहरे पर मुस्कान आ गई. सच ही तो कहता है कमल, छिली मटर, कटी सब्जी से खाना बनाना कितना सरल हो जाता है. वैसे अपने  देश में धूप में बैठ कर मटर छीलते-खाते जाने का भी तो अलग ही मज़ा होता है. थोड़ी ही देर में किचेन से मसालों. की सुगंध आने लगी. तहरी छौंक विभा ने रायता और सलाद भी आसानी से बना लिया. पापड़ तो पहले ही तल कर रख रखे थे.
डोर-बेल पर दरवाज़ा कमल ने ही खोला था. जींस पर पहिनी जैकेट से झांकती सफ़ेद टी-शर्ट पहिने जयकुमार के चहरे पर मीठी मुस्कान थी.
‘हाय जैकी. आओ. मम्मी जैकी आ गया.’ कमल ने विभा  को आवाज़ दी.
विभा के पहुंचते ही कमल ने विभा का परिचय दिया.
‘जैकी मेरी मम्मी से मिलो और मम्मी यही है मेरा प्यारा दोस्त जयकुमार, हम सब इसे जैकी ही पुकारते हैं.
“नमस्ते माँ, क्या मैं आपको माँ कह सकता हूँ?” हाथ जोड़ जैकी ने पूछा.
‘क्यों नहीं, मेरे लिए जैसा कमल वैसा ही तू है. देखा कमल, जैकी ने मुझे नमस्ते की, माँ कहा  और तू हिन्दुस्तानी हो कर भी हाय-हाय कहता है.’ विभा को अमरीकियों का हेलो की जगह हाय कहना कभी नहीं भाया.
“अरे मम्मी, यह बातें बना रहा है. कल ही इसने मुझसे पूछा था, माँ को विश कैसे करूंगा जिससे वह मुझसे इम्प्रेस हो सके.”’ कमल ने जैकी की सच्चाई बताई.
“जो भी हो, उसने कम से कम तेरी संस्कृति के बारे में तो जानना चाहा, यही क्या कम है.”
“ठीक है माँ, अब लंच मिलेगा या जैकी की तारीफ़ से ही पेट भरना होगा. जैकी कौन सी ड्रिक लेगा.’ कमल ने बात का रुख बदला.
तू तो जानता है, मेरे लिए तो सादा पानी ही सबसे अच्छी ड्रिंक है, कमल.’
कमल ने फ्रिज से जूस निकाल कर दो ग्लासों में ढाल कर एक जैकी की और बढाया.
“ये फ्रूट- जूस सेहत के लिए अच्छा है. टेबल पर तेरे लिए पानी भी रखा है.’
विभा को प्लेटें लाते देख जैकी सहायता के लिए खड़ा हो गया.
‘माँ, ये सब हम दोनों कर लेंगे. कमल तू माँ की हेल्प नहीं करता?”
‘अरे मेरी माँ बड़ी एफ़ीशिएन्स है. मुझे काम करने ही नहीं देती.” कमल ने बात बनाई.
‘अरे सच्चाई क्यों. नहीं बता देता, तू कितना बड़ा आलसी है. घर में. सब पर हुकुम ही तो चलाता था. कभी पानी का एक ग्लास भी अपने आप नहीं लिया.’ विभा ने शिकायत की.
‘ठीक है माँ, पर अब तो यहाँ. आकर सब काम खुद ही तो करता हूँ. ये बात दूसरी है जब से तुम आई हो, मुझे काम नहीं करने देतीं. इसमें गलती तुम्हारी ही है.’
‘अच्छा-अच्छा, अब बातें बनाना छोड़, जैकी को खाना परोस.’
जैकी माँ-बेटे  की नोक-झोंक सुन कर मुस्करा रहा था. प्लेट में परोसी तहरी ने उसे कोई भूली बात याद दिला दी. अनायास ही कह बैठा-
‘पापा को ऎसी तहरी बहुत पसंद थी. कहते थे उनके लखनऊ वाले घर में छुट्टी वाले दिन तहरी बनती थी. जिस दिन मम्मी घर में नही होती थी पापा तहरी बनाते थे, आपने साथ में दही- पापड वगैरह जो बनाया है, पापा भी ऎसी ही कोशिश करते थे, जैकी भूली यादों में खो सा गया. चहरे पर उदास छाया तैर गई.
बस कर यार, तेरे चेहरे पर उदासी अच्छी नहीं लगती. अरे तू बिंदास लड़का है, तेरे चेहरे पर हंसी ही खिलती है.”कमल ने प्यार से कहा.
“क्या तुम्हारी मम्मी पापा की पसंद का खाना नही बनाती थीं? हमारे यहाँ तो घर के पुरुष की पसंद को ही महत्व दिया जाता है. ये कमल भी रोज़ नई फरमाइश करता था और मुझे इसकी फरमाइश पूरी करनी पड़ती थी..” विभा के चेहरे पर मीठी मुस्कान आगई.
“असल में मेरी मम्मी पक्की अमरीकन थी और पापा ठेठ हिन्दुस्तानी थे. दोनों ने अपनी बेमेल मैरिज पता नही  कैसे ग्यारह साल तक खींची. मम्मी शादी के बाद पापा के साथ लखनऊ गई थी, पर वहां आधुनिक सुविधाओं के सर्वथा अभाव ने मम्मी के मन में इंडिया के लिए ऎसी नफरत भर दी कि पापा तक के लखनऊ जाने पर सख्त पावंदी लगा दी. पापा मन मार कर रह जाते. अमरीका की सुख-सुविधाओं के होने पर भी पापा अपना लखनऊ कभी नहीं भुला सके.
‘वैसे ये बात तो सच है भारत के सब घरों में यहाँ जैसी सुविधाएं नहीं है. यहाँ रहने वालों को इन सुविधाओं के बिना ऐडजस्ट कर पाना कठिन लगना स्वाभाविक ही है. विभा ने कहा.`
“अगर ऐसा है तो पापा लखनऊ को भुला क्यों नहीं सके?”
 “सच तो यह है, कहीं भी रहो, अपने देश की माटी से लगाव नहीं टूट सकता.”
“बिलकुल यही बात हीरजी आंटी भी कहती थीं, वह भी अपने देश की याद करती रहती थीं.”
“हीरजी आंटी कौन हैं, जैकी?”विभा उत्सुक हो उठी,
“आंटी अपने पति के साथ अमरीका आई थीं, उनके पति ने फ़ौज में नौकरी की थी. वियतनाम के साथ लड़ाई में वह शहीद हो गए. हीरजी आंटी अकेली पड़ गईं. उनसे शादी करने को बहुत लोगों ने प्रस्ताव दिए, पर आंटी ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए. मुझे अकेला जान कर उन्होंने अपने घर के दरवाज़े खोल दिए. काम करके आंटी की सहायता करनी चाही, पर उन्होंने पैसे स्वीकार नहीं किए. हमेशा कहतीं ये पैसे आगे पढाई के लिए काम आएँगे. आज उन्हीं की वजह से यहाँ तक पहुँच सका हूँ. जैकी की आवाज़ भीग सी गई.”
“तेरी आंटी तो सचमुच महान हैं. मै उनसे मिलना चाहती हूँ.”विभा ने आदर से कहा.
“काश आप उनसे मिल पातीं. मुझे यह जीवन दे कर वह इस संसार से  विदा हो गईं. आज वह नहीं हैं, पर मेरी यादों में वह हमेशा जीवित रहेंगी, अच्छा आज चलता हूँ.”अचानक जैकी उठ खडा हुआ. चहरे पर उदासी स्पष्ट थी.
जैकी के चले जाने के बाद बहुत देर तक विभा उसके अकेलेपन पर तरस खाती रही.
‘कैसा दुर्भाग्य है, माँ-बाप के रहते भी लड़का अकेला छोड़ दिया गया. भला हो उन आंटी  का जिसने पराई हो कर भी लड़के को घर की छत और सहारा दिया.”
“तुम बेकार परेशान हो रही हो, मम्मी. यहाँ ब्रोकेन फैमिलीज़ आम बात है. जी उचाट हो जाने पर आपसी सहमति से माँ-बाप एक दूसरे से अलग होकर अपनी नई दुनिया बसा लेते हैं. यहाँ के बच्चे इस बात को स्वाभाविक और सहज रूप में लेते हैं.” कमल ने समझाया
.विभा से मिलने के बाद जैकी अक्सर कमल के साथ उसके घर आ जाता. विभा के साथ बातें करना उसे अच्छा लगता. अब जैसे वह दूसरा ही जैकी होता जा रहा था. उसके खुले स्वभाव से कमल भी विस्मित होता. अब उदासी की जगह उसमे जीवन्तता आती जा रही थी. विभा के स्नेह ने उसे जैसे एक शरारती युवक बना दिया था. उसके मजाक विभा को भी हंसा जाते. शायद अब वह विभा के साथ अपना बचपन जी रहा था. जैकी के आने से विभा का खालीपंन  काफी सीमा तक दूर हो जाता था. फिर भी विभा संतुष्ट नहीं हो पाती. उसे भारत के रिश्तेदार और सखी सहेलियां याद आतीं. कमल से कहती-
“पता नहीं ये कैसा देश है. मुझे तो यहाँ अपना अकेलापन खलता है. अगर तेरे पापा हमें छोड़ कर इस दुनिया से न चले गए होते तो मै भला यहाँ हमेशा के लिए आती.”माँ आंसू पोंछती.
“परेशान न हो माँ, जल्दी ही तुम्हार्रा परिचय यहाँ की इन्डियन कम्यूनिटी से हो जाएगा तब तुम बोर नही होगी. तुम्हारा संगीत-ज्ञान तुम्हे बहुत पॉपुलर बना देगा.चाहो तो म्यूजिक क्लास शुरू कर दो, यहाँ बहुत स्टूडेंट्स मिल जाएंगे.”
कमल की बात में सच्चाई थी. भारतीय परिवार वाले अपने बच्चों को भारतीय संगीत की शिक्षा दिलाना चाहते थे. कम से कम इस तरह वे अपनी संस्कृति से कुछ सीमा तक जुड़ सकेंगे. विभा को कमल का प्रस्ताव अच्छा तो लगा, पर अभी वह इतनी जल्दी कोई निर्णय नहीं लेना चाहती थी. उसने संगीत की डिग्री प्रयाग संगीत समिति से ली थी. भारत में वह संगीत की अध्यापिका थी. विभा के मन में कुछ उत्साह हो आया. शायद इस तरह उसका अकेलापन भी दूर होगा. कुछ लोगों से मिल कर फैसला करना ठीक होगा.
एक सप्ताह बाद कमल ने अपने क्लास से वापस आकर खुशी से विभा से कहा–
“माँ लगता है भगवान् तुम पर मेहरबान हैं. तुम्हारा अकेलापन दूर करने के लिए तुम्हारी बातूनी भतीजी, आभा को यहाँ की यूनीवर्सिटी में एडमीशन मिला है. आज मामाजी ने फोन पर बताया. अब तो अपनी बक-बक से सारे घर की शान्ति भंग कर देगी.” कमल के शब्दों में स्नेह था.
‘अरे वाह, ये तो बड़ी अच्छी खबर है. जब से तू अमरीका आया, आभा ने जिद पकड़ ली थी, वह भी अमरीका जाएगी. पढाई में तो तेज़ थी ही, आखिर भैया को उसकी जिद माननी ही पड़ी. आभा बातें तो करती है, पर उसकी मीठी बोली कितनी प्यारी है, सुनते ही दुःख दूर भाग जाएं.
“ठीक है तुम ही उसकी मीठी बातें सुनना, मुझे डर है वो अपनी बकबक से मुझे परेशान न करे. वह हमारे साथ ही रहेगी इसी शर्त पर मामा उसे यहाँ भेज रहे हैं.”
‘तुम दोनों के बीच जितना प्यार है, जैसे मै जानती नहीं. विभा के चेहरे पर हलकी मुस्कान थी.  
 आभा को एक हफ्ते बाद आना था, विभा की खुशी का ठिकाना नही था. आभा की माँ की मृत्यु के बाद विभा ने ही उसे सम्हाला था. विभा ने आभा की मनपसन्द ढेर सारी खाने की चीजें बना डालीं. एक-एक दिन गिन कर आखिर वो दिन आ ही गया जिसकी सबको प्रतीक्षा थी. आभा को रिसीव करने जैकी भी आगया था.
एयरपोर्ट पर फ्लाइट पहुँचने की सूचना आ चुकी थी. करीब आधे घंटे बाद कंधे पर बैग लटकाए आती आभा दिखी थी. चहरे पर मुस्कान खिली थी. कमल के पास आई आभा को कमल ने गले लगा लिया. दोनों के चेहरों पर खुशी जगमगा रही थी.
“ओह तो यही हैं आभा दी ग्रेट , जिनके लिए माँ ने हज़ारों पकवान बना रखे हैं. वैसे इनके चेहरे पर तो कोई ख़ास आभा दिखाई नहीं देती. टिपिकल हिन्दुस्तानी सामान्य लडकी की इतनी तारीफें, मै तो कोई हूर की परी एक्स्पेक्ट कर रहा था.’ जैकी ने चिढाने के अंदाज़ में कहा.
“हेलो, आपकी तारीफ़? मेरे बारे में कुछ भी कहने का आपको किसने हक़ दिया? आभा का सुन्दर गोरा चेहरा लाल हो उठा था.
“मेरी तारीफ़ सुन पाने के लिए आपको काफी लंबा समय लगेगा. फिलहाल इतना जान लीजिए आपकी मदद के लिए यह बन्दा हमेशा हाज़िर रहेगा.” हंसते हुए जैकी ने कहा.
“थैंक्स , पर मुझे किसी की भी और कम से कम आपकी मदद तो कभी मंजूर नहीं होगी, मै अपनी मदद खुद कर सकती हूँ, समझे मिस्टर आप जो भी हों  – —-“
“अब बस भी कर यार, बहुत मज़ाक हो गई. मेरी बहिन का मूड मत खराब कर. आभा, ये मेरा पक्का यार जैकी है. इसकी आदत ही मज़ाक करने की है. चल घर चलें माँ इंतज़ार कर रही होंगी. जैकी, तू अपनी कार में सामान ले कर पहुँच.”
घर पहुंची आभा को सीने से चिपटाती विभा के आंसू बह निकले. उस समय भी जैकी मज़ाक करने से नही चूका-
“कमाल है, आभा के आने का इतना दुःख मना रही हैं, माँ. कोई बात नहीं आपने जो पकवान बना रखे हैं, वो तो मुझे खाने दीजिए. आभा जी तो फ्लाइट में खूब खाती हुई आई हैं. पर मेरा भूख से दम निकला जा रहा है.”
“पागल कहीं का, अरे ये तो खुशी के आंसू हैं, इतने दिनों बाद किसी अपने को देख रही हूँ.”आँचल से आंसू पोंछती विभा ने कहा.
“इसका मतलब मै आपका अपना नहीं हूँ. जब से आप मिली हैं मुझे महसूस होता है, मेरा भी एक घर है जहां मेरा इंतज़ार किया जाता है, पर मै शायद गलत था.’जैकी उदास सा दिखा.“
“अब माँ को इमोशनली ब्लैक मेल मत कर, यार. ये आभा ही तुझे ठीक करेगी. इसे सीधी समझने की गलती मत करना. मेरे भी कान काट सकती है.”कमल हंस रहा था.
“सच, तब तो इनसे दूर रहना चाहिए, वैसे देखने से तो ये इतनी डरावनी नहीं लगतीं.”
“चल आभा तू फ्रेश हो जा, इतनी दूर के सफ़र से आई है, थक गई होगी. मै खाना लगाती हूँ. इस जैकी की बातों पर ध्यान मत दे, मै ने ही प्यार दे कर इसकी आदत बिगाड़ दी है.”
“इनकी ऎसी बात ही कौन सी है, बुआ जिस पर ध्यान दिया जाए.”अपनी बात खत्म करती आभा तेज़ी से बाथरूम में फ्रेश होने चली गई. 
“एक बात तो ज़रूर है, आभा की बदौलत मुझे भी इतना बढ़िया खाना मिल रहा है. इस बात के लिए तो आपको शुक्रिया कहना ही पड़ेगा, आभा जी.’ खाने की मेज़ पर तरह-तरह के व्यंजन देख कर जैकी खुश हो गया.
“अच्छा आप शुक्रिया भी देते हैं? मुझे तो लगा आप बस व्यंग्य करना ही जानते हैं.”
“आप मेरे बारे में जब जानेंगी तब पता लगेगा मेरी क्वालिटीज़ की इतनी लंबी लिस्ट है. क्यों कमल ठीक कह रहा हूँ न?”
“भला तू कभी गलत हो सकता है. हाँ कल आभा को इसके डिपार्टमेंट तुझे पहुंचाना होगा, मेरी हेड के साथ मीटिंग है. इसे सब समझा देना. ऑफिस में पेपर्स जमा करने होंगे.”
“कमल भैया, मै अकेली जा सकती हूँ, मुझे किसी का एहसान नहीं लेना है.”
“अरे यूनीवर्सिटी इतनी बड़ी है, तू खो जाएगी, ये इंडिया नहीं है. वैसे भी इस जैकी पर मेरे बहुत एहसान हैं, इसी बहाने एक एहसान तो उतार सकेगा.” कमल ने परिहास किया.
दूसरी सुबह आभा जाने की तैयार थी मन में उत्सुकता थी कैसा होगा उसका डिपार्टमेंट. इंडिया में उसने ज्योग्राफी विषय में टॉप किया था. अब उसी विषय में वह पीएच.डी करने आई है. पापा ने कितनी मुश्किल से उसे अमरीका आने की इजाज़त दी है.
ठीक समय पर जैकी हाज़िर था. बड़ी इज्ज़त से कार की अगली डोर खोल जैकी ने आभा को बैठने को कहा था. “थैंक्स” कहती आभा बैठ गई.
हरी घास और पेड़ों से घिरी डिपार्टमेंट की भव्य इमारत ने आभा को मुग्ध कर लिया. सामने नीला सागर दूर से दिख रहा था. भूगोल विषय के अनुरूप स्थान का चुनाव सराहनीय था.
“वाह, सामने लहराता सागर, पर खाली टाइम में सागर की सैर मत करने चली जाना. याद रखना यहाँ पढने आई हो. अमरीका में इंडिया जैसी आसान पढाई नहीं होगी.” जैकी ने चिढाया.
“थैंक्स फॉर योर एडवाइस. मैने बिना पढ़े टॉप नहीं किया है, जनाब. अब आप जा सकते हैं, घर मै खुद वापस पहुँच जाऊंगी. मेरे पास रोड- मैप है.”
“आर यू श्योर, खो जाओ तो काल कर लेना, यह अमरीका है, यहाँ. अच्छे-अच्छे भटक जाते हैं.”
“भूलिए मत मत, मेरा विषय भूगोल है. अमरीका की रोड तक पढ़ रखी हैं. बाय.’
डिपार्टमेंट के ऑफिस में सारी फौर्मलिटीज़ पूरी कर के आभा अपने गाइड से मिली थी. गाइड एक प्रौढ़ अमरीकी डाक्टर जोनाथन थे. आभा के विषय पर चर्चा करते समय उन्होंने कई उपयोगी सुझाव दिए और पहले ही दिन आभा को लाइब्रेरी देखने की सलाह दी.
“यहाँ लाइब्रेरी में तुम्हे अपने विषय से संबंधित बहुत मैटीरिअल मिल जाएगा. कम्प्यूटर की सुविधा सब विद्यार्थियों को है. सबसे पहले विषय पर डेज़रटेशन तैयार करना होगा. उसके अप्रूवल के बाद रिसर्च-वर्क शुरू कर सकोगी. उम्मीद है तुम मेहनत से सफलता पा सकोगी.”
“आपको निराश नहीं करूंगी,सर.”
‘सर नहीं मुझे सब जॉन कहते हैं, तुम भी इसी नाम से पुकारोगी.’ मुस्करा कर जोनाथन बोले.
अपने गाइड से बातें कर के आभा संतुष्ट थी उसका अमरीका आने का निर्णय गलत नहीं था. अब जल्दी ही वह अपना काम शुरू करेगी. घर वापसी के समय जैकी की चुनौती का चैलेन्ज था. यूनीवर्सिटी के बस-स्टैंड पर लगे बोर्ड से आभा ने अपनी बस चुन ली. वह जनाब जैकी को दिखा देगी, वह कितनी सक्षम है. थोड़ी कठिनाई के बाद घर पहुंची आभा बेहद प्रसन्न थी. अब जैकी को पता लगेगा आभा क्या चीज़ है. आभा के मोबाइल पर जैकी था –
“कहिए , मिस आभा, कहाँ हैं आप? डरने या परेशान होने की ज़रुरत नहीं है, बताइए, किस जगह पर हैं, लेने  पहुंच जाऊंगा.”
“थैंक्स फॉर योर कंसर्न मिस्टर जयकुमार. बिना किसी परेशानी के घर आगई हूँ और इस वक्त मजेदार पकौड़ों के साथ चाय पी रही हूँ.”
दस मिनट में जैकी हाज़िर था.
“ये तो बड़ी बेइंसाफी है, माँ, बेटी के आते ही इस बेटे को भुला दिया. यहाँ. मै इनके रास्ता भटकने के डर से दिन भर लंच के बिना रहा और ये यहाँ पकौड़े उड़ा रही हैं.”
“ऐसे क्यों कह रहा है, जैकी. आभा के आने के पहले तू ही तो मुझे हंसाता रहा है. आ तू भी पकौड़े खा कर बता कैसे बने हैं.”विभा ने स्नेह से कहा.
“अब बताइए मै स्मार्ट हूँ या नहीं?’ शोखी से आभा ने कहा
‘मान गया, हज़ार बार मान गया. आप सुपर गर्ल हैं. अब मुझे पकौड़ों का मज़ा लेने दो, तुम तो देर से खा रही हो, कुछ मेरे लिए भी तो छोड़ दो.’ जैकी ने पूरी प्लेट अपने सामने खींच ली.
“ठीक है, मै भुक्कड़ नहीं हूँ. जो दिन भर भूखा रहा हो, उसे सारे पकौड़े खाने देना पुन्य होगा.”
“थैंक्स, ये हुई ना इन्साफ की बात.’ आभा की तीखी बात से बेपरवाह जैकी खाता रहा.
दिन बीतते जा रहे थे. आभा कड़ी मेहनत कर रही थी, अचानक इंडिया से कमल के एकमात्र चाचा की सीरियस बीमारी की खबर मिलते ही कमल को इंडिया जाना पड़ा था. जैकी ने आश्वस्त किया था कमल की अनुपस्थिति में वह माँ और आभा का ख्याल रखेगा. जैकी रोज़ आकर उनकी खोज-खबर ही नहीं लेता था बल्कि उनका मन भी बहलाता था. आभा को परेशान करने में उसे ख़ास मज़ा आता. यहाँ तक कि लाइब्रेरी में काम कर रही आभा को बीच-बीच में आकर उसके काम में बाधा डालना मानो उसका फ़र्ज़ होता. लाइब्रेरी के शांत वातावरण में भी उसे चिढाने से बाज़ नहीं आता.
“इतनी मेंहनत किस लिए कर रही हो, आखिर तो शादी के बाद ये पढाई काम आने से रही. इससे अच्छा अपनी बुआ से बढ़िया खाना पकाना सीख लो. पति का प्यार पेट के रास्ते से ही जीता जा सकता है.” जैकी शरारत से हंसता.
“छि:, अमरीका में रह कर भी तुम्हारी सोच इतनी छोटी है. तुम्हारी अमरीकी पत्नी तो बुआ जैसा खाना पकाने से रही.” आभा व्यंग्य करती.
“किसने कहां मेरी पत्नी अमरीकी लड़की होगी. मुझे तो ठेठ हिन्दुस्तानी पत्नी चाहिए.जैकी की गहरी नज़र आभा को परेशान कर जाती.
 “वैसे तुम्हारा ये फैसला तो ठीक ही है. अमरीकी लड़की तुम्हारे दकयानूसी ख्यालों के साथ तो ऐडजस्ट करने से रही. किसी इन्डियन शेफ़ की बेटी से शादी करना, वो खाने में रोज़ नई-नई डिशेज़ बना कर सर्व करेगी..”
“वैसे तुम्हारा अपने बारे में क्या ख्याल है? मै भी तो तुम्हारा एक उम्मीद्वार हो सकता हूँ.”
“जैकी तुम्हारी शिकायत बुआ और कमल भैया से करनी होगी. क्या समझते हो अपने को? पता नहीं मुझसे क्या दुश्मनी है, काम नहीं करने देते.” आभा झुंझलाती, इस पर भी जैकी की शिकायत कमल या बुआ तक कभी नहीं पहुंची.
“सॉरी, माफ़ कर दो. मजाक कर रहा था. चलो तुम्हारा मूड ठीक करने को आइसक्रीम खाने चलें.पास में एक नया आइसक्रीम-पार्लर खुला है. वहाँ दूर-दूर से लोग आते हैं.”
“तुम्हें अपना नया पार्लर मुबारक हो, मुझे आइसक्रीम पसंद नहीं, अब जाओ मुझे काम पूरा करना है. जानते हो न, लाइब्रेरी में बातें करना मना है.”
 ’अगर आइसक्रीम पसंद नहीं तब तो तुम्हारा पति बड़ा खुशनसीब होगा, उसके पैसे जो बचेंगे. यहाँ. की लडकियां तो आइसक्रीम से ही पेट भरती हैं.”जैकी चिढाता.          
“मेरे पति या उसके पैसों की चिन्ता तुम्हे क्यों है, मिस्टर जयकुमार ? वैसे भी आपकी जानकारी के लिए मेरा पति कंजूस नहीं, दिलदार होगा.”आभा नाराज़ होती.
“मुझसे उसका वास्ता जो है. खैर आज नहीं फिर कभी समझोगी.” आभा को विस्मित छोड़ जैकी चला गया.
कुछ देर तक आभा जैकी की बातों का अर्थ समझने की कोशिश करती रही, उसकी जो समझ में आरहा था, उससे वह अनजान नहीं थी. आभा को जैकी की बातें अच्छी लगतीं, अपने को बहलाने के लिए वह सोचती, वैसी बातें दो मित्र भी तो करते हैं. वह घर से इतनी दूर पढने आई है, पापा ने कितने विश्वास से उसे यहाँ भेजा है, उसके पास प्रेम करने जैसी बकवास चीज़ के लिए समय नहीं है. जैकी से कहना होगा वह उसका समय बर्बाद न किया करे. फिर भी अगर जैकी एक दिन भी घर नहीं आता तो विभा की तरह आभा भी उसे मिस करती. कमल को चाचा की मृत्यु के कारण इंडिया में और रुकना पड़ रहा था. कमल की कमी जैकी की वजह से उतनी नहीं खलती. कभी घर पहुँच कर विभा से स्पेशल खाने की फरमाइश करता, कभी आभा को चिढाता.
 एक शाम जैकी कुछ थका सा दिख रहा था. विभा ने कारण जानना चाहा
 “क्या बात है जैकी, तू थका सा लग रहा है, तबियत तो ठीक है?”
“कुछ ख़ास नहीं, बस सर में दर्द है. आपकी चाय की खराब आदत जो डाल ली है¸कल आ नही पाया, चाय नहीं मिली तो सर में दर्द हो गया. कल तो बहुत तेज़ दर्द था.”
“वाह जनाब,अगर जानते हैं कि चाय की आदत खराब है तो क्यों पीते हैं? अगर आदत छोड़ दो तो पत्नी को चाय बनाने के काम से छुट्टी मिल जाएगी.” आभा के आइसक्रीम पसंद न होने की बात पर जैकी ने कहा था पति के पैसे बचेंगे, आभा ने उसी बात का जैसे जवाब दिया था.
“रहने दे आभा, तू तो उसका सर दर्द बढ़ा देगी. मै अभी अदरक की चाय लाती हूँ, तेरा दर्द भाग जाएगा.” विभा उठ कर किचेन में चली गई.
“सच कहो, अगर चाय पीना छोड़ दूं तो तुम्हारा समय बचेगा?” जैकी की मुग्ध दृष्टि आभा पर निबद्ध थी.
“मुझसे क्यों पूछ रहे हो, मैने तो तुम्हारी पत्नी के बारे में कहा था.”
“उसी से तो पूछ रहा हूँ.” गंभीर आवाज़ में जैकी ने कहा.
“जैकी हमें ऐसा मज़ाक पसंद नहीं है, समझे. अगर ऎसी बातें करोगे तो हम तुमसे बात नहीं करेंगे.” आभा ने नाराजगी से कहा.
जैकी कुछ कहने ही वाला था कि विभा चाय के साथ आ गई.
 “ये ले चाय और मठरी खा ,पता नहीं कल कुछ खाया भी था या नहीं. कभी-कभी भूखे रहने पर भी सर दर्द हो जाता है.” विभा ने ममता से कहा.
“काश आप जैसी मेरी मेरी माँ होतीं.” जैकी भावुक था.
“क्यों क्या मै तेरी माँ नही हूँ.” स्नेह से विभा बोली.
चाय का सिप लेते ही जैकी कराह उठा. हाथ में पकड़ा कप हाथ से छूट गया. दोनों हाथों से सर थाम जैकी ने मेज़ पर सर टिका दिया. पीड़ा से चेहरा पीला पड़ गया. विभा और आभा दोनों घबरा गईं.
आभा, जल्दी से मेरे कमरे से बाम ले आ और पास वाले डॉक्टर अंकल को बुला ला.’
थोड़ी देर माथे पर बाम लगाने से जैकी को आराम सा महसूस हुआ.
“अब ठीक लग रहा है, डॉक्टर बुलाने की कोई ज़रुरत नहीं है. कल एक प्रोजेक्ट पर पूरी रात काम करता रहा, शायद इसीलिए सर में दर्द हो गया. सॉरी चाय गिर गई.”
‘चाय की परवाह करने की ज़रुरत नहीं है. आभा अभी दूसरी चाय बना लाएगी.’
“एक बात बता क्या कभी पहले भी ऐसा सर दर्द हुआ है? आज तो मै डर गई थी.”
“पिछले कुछ दिनों से ज़्यादा रात तक काम करने पर सर भारी हो जाता है, पर आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ दर्द था. आप परेशान न हों ,माँ. मै ठीक हूँ.”जैकी ने मुस्कराने का असफल प्रयास किया,पर घेहरे पर दर्द की लकीरें स्पष्ट थीं.
कमल वापस आ गया था. उसके आने से घर में रौनक आ गई थी. विभा पूरे परिवार का हाल-चाल पूछती रही. आभा के पापा ने आभा के लिए नए कपड़े और मिठाइयां भेजी थीं. जैकी ने आते ही मिठाइयों पर अधिकार ज़माना शुरू कर दिया.
“वाह हिन्दुस्तान की मिठाइयों का जवाब नहीं. आभा अगर ये मिठाइयां खाएगी तो मोटी हो जाएगी. ये तो मेरे और कमल के लिए हैं.”
“मै मोटी रहूँ या पतली, आपको क्या फर्क पड़ेगा, बस अब एक भी मिठाई का दाना नहीं मिलेगा, समझे जनाब.’ आभा ने मिठाइयों की प्लेट जैकी से छीन ली
“तुम दोनों की नोक-झोंक चलती रहे, इस बीच सारी मिठाई मै ही खत्म कर डाळूंगा, कमल ने हंसते हुए कहा.
दिन बीत रहे थे. इस बीच अचानक् जैकी अनमना सा रहने लगा. कमल के घर आना भी बहुत कम हो गया. कमल ने बताया जैकी हेड की किसी बड़ी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. काम पूरा करने के लिए रात में ठीक से सोता भी नहीं. अक्सर सर- दर्द उसे परेशान करता है. दर्द की गोलियां खा कर काम करता रहता है. एक दिन तो बेहोश सा गिर गया था. पूछने पर बोला-
“रात में नींद पूरी न होने की वजह से कभी-कभी बैलेंस बिगड़ जाता है. कभी पैर लड़खड़ा भी तो सकते हैं. तू बेकार परेशान है.” जैकी समझाता.
 “मेरी समझ में नहीं आता काम ज़्यादा ज़रूरी है या तेरी हेल्थ? शायद नोबल प्राइज़ तुझे ही मिलेगी. इस उम्र में पैर लड़खडाना क्या ठीक बात है?”
“अरे ये तो ठीक बात नहीं है, उससे कह किसी डॉकटर को दिखाए.” सुन कर विभा कंसर्न थी.
“किसी की सुनता कहाँ है, भूत की तरह काम में लगा हुआ है.” कमल बताता.
जैकी ने घर आना करीब बंद सा कर दिया था. उसका सर दर्द उसे परेशान कर रहा था. कमल ने जब उससे घर न आने की वजह पूछी तो जैकी ने कहा था-
“शायद रातों में ठीक से सो नहीं पाता, अक्सर सवेरे वोमिटिंग हो जाती है. कुछ खाने का मन नहीं करता. माँ से कहना, एक बार ये प्रोजेक्ट पूरी हो जाए तो जी भर के माँ के हाथ का बना खाना खाऊंगा और आराम से खूब सोऊँगा.”
आभा को जैकी की शरारत भारी बातें याद आतीं सच तो यह था वह पुराने जैकी को मिस करती थी. जैकी के बिना जैसे उसका मन उचाट रहता. लाइब्रेरी में काम करते हुए भी वह जैकी की प्रतीक्षा करती. सोचती, क्यों वह कोई दूसरा जैकी होता जा रहा था.? कहीं ऐसा तो नहीं उसे किसी और लड़की से लगाव हो गया हो. अपनी सोच को झटका दे, वह काम में मन लगाने की कशिश करती. अपने से डरती कहीं उसे जैकी से प्यार तो नहीं हो गया था?
अचानक जैकी किसी को बिना कोई खबर दिए कहीं बाहर चला गया. कमल को भी उसने कुछ नहीं बताया. सब परेशान थे. ऐसा क्या हुआ कि जैकी लापता था. विभा नाराज़ थी.
“क्या हुआ कमल, तुझे भी बिना बताए कहीं चला गया. कुछ कह कर भी नहीं गया. माना कि उसे कोई ज़रूरी काम रहा होगा, पर कम से कम बता कर तो जाता.”
आभा बेचैन थी, पर अपनी बेचैनी किसी पर प्रकट कैसे करती. वह अपने आप से डरने लगी थी, कहीं उसे जैकी से प्यार तो नहीं हो गया, वरना उसकी याद उसे क्यों इस कदर बेचैन कर जाती. बेसब्री से आभा ही नहीं कमल और विभा भी जैकी का इंतज़ार कर रहे थे. डिपारटमेंट के हेड तक को जैकी के कहीं जाने की वजह नहीं पता थी. उसका अता-पता किसी के पास नहीं था. जाने के पहले उसने एक मत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरी करके हेड की प्रशंसा ज़रूर पा ली थी.
जैकी की प्रतीक्षा में डेढ़ महीने बीत गए. कमल ने जैकी के बारे में पता करने की बहुत कोशिश की, पर कोई नतीजा नहीं निकला. जैकी जैसे एक पहेली बन गया था. आभा को हर पल लगता वह अचानक आकर उसे चौंका देगा ‘
“कहिए, मिज़ इतना पढ़ कर किसे इम्प्रेस करने का इरादा है. हम तो पहली नज़र में ही आप पर फ़िदा होगए थे.” फिर वही मोहक हंसी.
“अगर पता होता वह ऐसा निर्मोही निकलेगा तो उससे नेह ही क्यों बढाती.”विभा कहती.
एक दिन आभा लाइब्रेरी से नोट्स ले कर घर वापिस ही आने वाली थी कि लाइब्रेरी के चपरासी ने आभा के नाम का एक लिफाफा लाकर दिया. लिफ़ाफ़े पर बॉसटन का स्टैम्प देख कर आभा खिल उठी. तो जनाब अब अपना नकाब उतार कर प्रकट हो रहे हैं. आने दो अच्छी खबर लूंगी. धड़कते दिल से लिफाफा खोला था. पत्र में किसी डॉकटर का अंग्रेज़ी में संक्षिप्त नोट था. नोट के साथ एक सीडी थी.
अभा जी,
आपको सूचित करते दुःख है कि मिस्टर जयकुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे. ब्रेन ट्यूमर की लास्ट स्टेज होने की वजह से उनका ऑपरेशन सफल नहीं हो सका. ऑपरेशन के कुछ दिन पहले उनकी कुछ बातें रिकार्ड की थीं. आपको वही सीडी भेज रहा हूँ. शायद आप उनके सबसे अधिक निकट थीं. सोचता हूँ, इस सीडी की आप ही अधिकारी हैं.
नीचे डॉकटर के हस्ताक्षर थे.
आभा स्तब्ध रह गई. आंखें भर आईं. यह अविश्वसनीय था. पर ऐसा क्या था सीडी में कि डॉकटर ने आभा को जैकी के सबसे अधिक निकट का समझा. जैकी अब इस दुनिया में नहीं रहा, पर आभा को तो उसकी प्रतीक्षा थी, क्यों सोचती थी कभी आकर वह ज़रूर कहेगा-
 ”मेरा इंतज़ार कर रही थीं ना, सच कहना मेरे बिना मन जो नहीं लगता होगा. वैसे तुम्हारी याद तो मुझे भी आती थी, मिलने के दिन गिन रहा था. अब और नहीं सताऊंगा. वादा रहा.’
घर में सबके सामने सीडी पर जैकी की बातें सुनना क्या ठीक होगा, डॉक्टर ने क्यों लिखा है इस सीडी की वही सच्ची अधिकारिणी है? नहीं, अभी किसी एकांत कोने में बैठ कर जैकी की अंतिम बातें, आभा अपने ळैप टॉप पर अकेले ही सुनेगी. कांपते हाथों से आभा ने सीडी लगाई थी. डॉक्टर जैकी से पूछ रहे थे-
“ठीक हो कर सबसे पहले किस् से मिलना चाहोगे, जयकुमा?”
आभा से, डाक्टर, अपनी ज़िंदगी मैने उसी के नाम जो कर दी है.”
“बहुत प्यार करते हो आभा को?”
“प्यार किसे कहते हैं, आभा से मिलने पर ही जाना है. आभा मेरे दिल की धडकन है, डाकटर. पहले दिन से ही उसकी और खिचता चला गया. सच कहूं तो अपनी ज़िन्दगी को कभी अहमियत नहीं दी. पर अब ज़िंदगी का मज़ा आने लगा था. उसका साथ अच्छा लगता, उसे छेड़ने में मज़ा आता. अपनी बीमारी के ये दिन बस उससे मिलने की चाह में बिता रहा हूँ.”
 “उसे अपने ऑपरेशन की खबर दी है?’डॉक्टर ने जानना चाहा.
नहीं, डॉकटर, ठीक होने पर जब सरप्राइज़ दूंगा, तब मज़ा आएगा.”
“अपने किसी परिचित, रिश्तेदार को भी यहाँ आने की खबर नहीं दी.?
‘नहीं डॉक्टर, ब्रेन ट्यूमर डायग्नोस करते ही मेरे डॉक्टर ने मुझे फ़ौरन आपके नाम रेफरेन्स लेटर देकर बिलकुल इंतज़ार ना करने की सलाह दी थी. उनकी इस बात से समझ गया था कोई गंभीर बात है, आभा या अपने दोस्त को डराना नहीं चाहता था.“
“आभा भी तुम्हें इतना ही प्यार करती है, जयकुमार?”
‘’मैने कभी जानने की ज़रुरत ही नहीं समझी, अपने प्यार पर विश्वास है, वह कुछ ना भी कहे, पर मै जानता हूँ, वह भी मुझे चाहती है. मुझे जीना है, डॉकटर, मै ठीक हो जाऊंगा न?’
“हम पूरी कोशिश करेंगे. यह चमत्कार ही है कि तुम्हारी स्मृति ठीक है वरना इस हालत में अक्सर रोगी किसी को पहचानते तक नहीं. अब आराम करो.’
आभा के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे. जैकी को आभा के प्यार पर इतना विश्वास गलत तो नहीं था. जब से जैकी का अता-पता नहीं था आभा किस कदर बेचैन रहती. विभा से जैकी की बातें सुनती उदास हो जाती. शायद कोई भी दिन ऐसा नही गया जब उसने जैकी को याद न किया हो. जैकी जैसे उसके जीवन में उजाला ले कर आया था, अब वो उजाला अन्धकार में विलीन हो गया था. जिसे अपनों से भी प्यार नहीं मिला, उसे आभा के प्यार पर इतना विश्वास था. आभा से ही उसने प्यार का अर्थ जाना था. काश आभा उसे बता सकती, वह जय को चाहने लगी थी, शायद उसकी यह बात अंतिम समय में जय को इस दुनिया से विदा लेते संतोष दे जाती.

बहुत देर हो चुकी थी. उजली धूप की जगह शाम के काले साए घिरते आरहे थे. आंसू पोंछ आभा घर जाने को उठी थी. नहीं वह जैकी की आखिरी बाते. किसी के साथ शेयर नहीं कर सकती, वह नितांत उसकी अपनी निधि हैं. कमल और विभा बुआ से इतना कहना ही काफी होगा, उसके फोन पर किसी ने जैकी की मृत्यु की सूचना दी थी. आभा ने उस नंबर पर फोन लगाने की कोशिश की, पर फोन किसी पब्लिक बूथ से किया गया था, शायद किसी ने मज़ाक किया हो- अच्छा है वे इसी खुशफहमी में जीते रहें, उनका जैकी कभी वापस आएगा.

अनाम रिश्ता

फ़ॉल के बाद

अनुबन्ध

प्यार की सज़ा

दहकते पलाश

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 25 other followers